रैन कटी आकाश के नीचे
सिया अनुज अरु मित्र के साथा
प्रात समय उठ तीरथ राज
प्रयाग की ओर चले रघुनाथा
प्रयाग की ओर चले रघुनाथा
को कही सकहि प्रयाग प्रभाऊ
कलुष कुंज कुंजर मृग राऊ
अस तीरथ पथी देखी सुहावा
सुख सागर रघुवर सुख पावा
सुख सागर रघुवर सुख पावा
गंगा जमुना सरस्वती तट
राम लखन संग सिय सुख देनी
आज त्रिवेणी से मिलने ज्यों
आई हो एक और त्रिवेणी
आयी हो एक और त्रिवेणी
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