कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे
कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
कोई जब पूछ बैठेगा ख़ामोशी का सबब तुमसे
कोई जब पूछ बैठेगा ख़ामोशी का सबब तुमसे
बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा ना पाओगे
बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा ना पाओगे
मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे
कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
मेरा गम मुस्कुराने पर तुम्हें मजबूर कर देगा
मेरा गम मुस्कुराने पर तुम्हें मजबूर कर देगा
किसी महफ़िल मे जाओगे तो रसमन मुस्कुराओगे
किसी महफ़िल मे जाओगे तो रसमन मुस्कुराओगे
मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे
कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
तसव्वुर मे कभी आऊँगा लम्हाते हसी बन कर
तसव्वुर मे कभी आऊँगा लम्हाते हसी बन कर
कभी आहट मेरी पाओगे और मुझ को ना पाओगे
कभी आहट मेरी पाओगे और मुझे को ना पाओगे
मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे
कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे
कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
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